वर्ष 2025 का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण आज 21 सितंबर को लग रहा है। यह एक आंशिक सूर्य ग्रहण होगा, जिसमें चंद्रमा सूर्य के कुछ हिस्से को ढक देगा और सूर्य अर्धचंद्राकार रूप में दिखाई देगा। कहां दिखाई देगा ग्रहण? समय (भारतीय समयानुसार) ज्योतिषीय महत्व 122 साल बाद बना अद्भुत संयोग
क्या गरुड़ पुराण को घर में नहीं रखना चाहिए? सत्य और भ्रांतियों का विश्लेषण
आज के समय में कुछ कम जानकार लोगों ने समाज में यह अंधविश्वास फैला दिया है कि गरुड़ पुराण को घर में रखना अशुभ होता है। हालाँकि, किसी भी शास्त्र या हिंदू पुराण में ऐसा नहीं लिखा गया है कि इसे घर में नहीं रखना चाहिए। हिंदू धर्म के अन्य पवित्र ग्रंथों की तरह ही, […]
धर्मग्रंथों के अनुसार पैर छूने की परंपरा: सही समय, सही व्यक्ति और वर्जनाएँ
सनातन संस्कृति में पैर छूने (दंडवत प्रणाम) केवल शिष्टाचार या आदर का भाव नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरे धार्मिक और सामाजिक नियम भी हैं। शास्त्रों और परंपराओं में स्पष्ट कहा गया है कि हर किसी के पैर छूना उचित नहीं होता। कब पैर छूना चाहिए संत, गुरु और ऋषि-मुनि – ज्ञान और आशीर्वाद प्राप्त […]
भारत में 2030 तक 2.7 करोड़ बच्चे मोटापे से प्रभावित हो सकते हैं : यूनिसेफ
भारत में मोटापा बच्चों के लिए तेजी से एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनकर उभर रहा है। यूनिसेफ (UNICEF) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, यदि मौजूदा रुझान जारी रहे तो वर्ष 2030 तक भारत में करीब 2 करोड़ 70 लाख (27 मिलियन) बच्चे मोटापे से ग्रसित हो सकते हैं। वैश्विक परिदृश्य रिपोर्ट में बताया गया है […]
जानिए, क्या महिलाएं भी तर्पण अथवा पिण्डदान करने की अधिकारी? माता सीता ने किया था राजा दशरथ का पिण्डदान
हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास की पूर्णिमा से लेकर आश्विन अमावस्या तक पितृ पक्ष मनाया जाता है। यह कालखंड पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित करने और उनके प्रति आभार प्रकट करने का होता है। आमतौर पर श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान पुरुषों द्वारा किए जाते हैं। लेकिन कई बार यह प्रश्न उठता है कि क्या महिलाएं […]
पितृ पक्ष में कौओं को भोजन कराने का महत्व और उससे जुड़े रहस्य
सनातन धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व है। इस वर्ष पितृ पक्ष 7 सितंबर से 21 सितंबर तक मनाया जाएगा। शास्त्रों में कहा गया है कि इस अवधि में किए गए श्राद्ध, तर्पण और दान से पितर प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं। कौओं को भोजन कराना इस काल की सबसे प्रमुख परंपरा मानी जाती […]
पितृ पक्ष 2025 : कब से कब तक, तिथियां, श्राद्ध की विधियां, मान्यताएं और दान का महत्व
सनातन धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व है। यह केवल एक कर्मकांड नहीं, बल्कि पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। प्रत्येक वर्ष भाद्रपद पूर्णिमा से अश्विन अमावस्या तक चलने वाला यह पर्व सोलह श्राद्ध, महालय पक्ष या अपर पक्ष के नाम से भी जाना जाता है। भगवदगीता (अध्याय 9, […]
Ganesh Chaturthi 2025: पृथ्वी पर प्रथम स्थापित गणपति मंदिर – आदि गणेश मंदिर प्रयागराज
प्रयागराज, जिसे तीर्थों का राजा कहा जाता है, अपने आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है। प्रयागराज, गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी आध्यात्मिक गहराई और ऐतिहासिक मंदिरों के लिए भी प्रसिद्ध है। इस पवित्र नगरी में एक ऐसा मंदिर है जिसका महत्व स्वयं सृष्टि की रचना […]
हयग्रीव अवतार जन्मोत्सव विशेष | हयग्रीव अवतार की पौराणिक कथा | जन्म का महत्व
भारतीय संस्कृति में ज्ञान, बुद्धि और वेदों का विशेष महत्व है। इन सभी के संरक्षक और प्रतीक के रूप में भगवान विष्णु के हयग्रीव अवतार की पूजा की जाती है। हयग्रीव जयंती हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। यह दिन ज्ञान, शिक्षा और विद्या से जुड़े लोगों के लिए अत्यंत शुभ […]
सावन 2025 विशेष – पहली बार रख रहे हैं सावन सोमवार व्रत? इन ज़रूरी बातों का रखें ध्यान!
सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है और इस दौरान पड़ने वाले सोमवार का विशेष महत्व होता है। अगर आप इस साल पहली बार सावन सोमवार का व्रत रखने जा रहे हैं, तो यह एक बहुत ही शुभ और पवित्र निर्णय है। लेकिन, किसी भी व्रत की तरह, सावन सोमवार व्रत के भी […]
कांवड़ यात्रा: आस्था और समर्पण का महापर्व – (सावन 2025 विशेष)
उपासना डेस्क, नॉएडा : सावन का महीना आते ही, भगवान शिव की भक्ति में लीन होकर, गेरुआ वस्त्र धारण किए भक्तों का एक अद्भुत सैलाब सड़कों पर उमड़ पड़ता है। ये भोले के भक्त ‘बम बम भोले’ का जयकारा लगाते हुए, सैकड़ों किलोमीटर की पैदल यात्रा करते हैं, अपने कंधों पर कांवड़ लिए हुए। लेकिन […]
प्रयागवाल समाज का गौरव: महाकुंभ नगर में झंडों का ऐतिहासिक महत्व
प्राचीन काल से तीर्थराज प्रयागराज, गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर स्थित है। यहां के तीर्थ पुरोहित सदियों से श्रद्धालुओं को मुक्ति का मार्ग दिखाते आ रहे हैं। इनकी पहचान ही प्रयागराज की पहचान है। दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए यहां तीर्थ पुरोहितों से संपर्क […]