दोहा कनक बदन कुण्डल मकर, मुक्ता माला अड्ग । पद्मासन स्थित ध्याइये, शंख चक्र के सड्ग ॥ चौपाई जय सविता जय जयति दिवाकर । सहस्त्रांशु सप्ताश्व तिमिरहर ॥ भानु पतंग मरीची भास्कर सविता । हंस सुनूर विभाकर ॥ विवस्वान आदित्य विकर्तन । मार्तण्ड हरिरूप विरोचन ॥ अम्बरमणि खग रवि कहलाते । वेद हिरण्यगर्भ कह गाते […]
|| श्री खाटू श्याम चालीसा ||
दोहा श्री गुरु चरण ध्यान धर, सुमिरि सच्चिदानन्द। श्याम चालीसा भजत हूँ, रच चैपाई छन्द।। चौपाई श्याम श्याम भजि बारम्बारा, सहज ही हो भवसागर पारा। इन सम देव न दूजा कोई, दीन दयालु न दाता होई। भीमसुपुत्र अहिलवती जाया, कहीं भीम का पौत्र कहाया। यह सब कथा सही कल्पान्तर, तनिक न मानों इनमें अन्तर। बर्बरीक […]