पौष पूर्णिमा स्नान पर्व पर उमड़ा आस्था का सैलाब, 31 लाख श्रद्धालुओं ने संगम में लगाई डुबकी

माघ मेले के प्रथम स्नान पर्व पौष पूर्णिमा के अवसर पर प्रयागराज के संगम तट पर आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। प्रातःकाल से लेकर रात्रि 8 बजे तक लगभग 31 लाख श्रद्धालुओं ने पवित्र संगम में स्नान किया, जिनमें करीब 5 लाख कल्पवासी भी शामिल रहे। प्रशासन की सतर्कता और सुव्यवस्थित तैयारियों के चलते स्नान पर्व पूर्णतः सुरक्षित एवं शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।

माघ मेले के प्रथम स्नान पर्व पौष पूर्णिमा के पावन अवसर पर आज श्रद्धालुओं का अभूतपूर्व जनसैलाब संगम तट की ओर उमड़ पड़ा। सुबह से ही हर-हर गंगे के जयघोष के बीच श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई। रात्रि 8 बजे तक लगभग 31 लाख श्रद्धालुओं ने संगम क्षेत्र में स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा एवं सुव्यवस्थित संचालन सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क रहा। अपर पुलिस महानिदेशक श्री संजीव गुप्ता, पुलिस महानिरीक्षक श्री अजय मिश्र, मंडलायुक्त श्रीमती सौम्या अग्रवाल, पुलिस कमिश्नर प्रयागराज श्री जोगिंदर सिंह, अपर पुलिस आयुक्त श्री अजयपाल शर्मा, जिलाधिकारी श्री मनीष कुमार वर्मा, मेलाधिकारी श्री ऋषिराज एवं मेला पुलिस अधीक्षक श्री नीरज पांडेय सहित सभी वरिष्ठ अधिकारी लगातार मेला क्षेत्र में मौजूद रहकर व्यवस्थाओं की निगरानी करते रहे।

प्रशासन की सुनियोजित और समन्वित व्यवस्था का परिणाम रहा कि पौष पूर्णिमा का यह प्रथम स्नान पर्व बिना किसी अप्रिय घटना के सकुशल संपन्न हुआ और श्रद्धालुओं को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचाया गया।

इस वर्ष माघ मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु कई नवाचार भी किए गए। 17 नंबर पार्किंग से लेटे हनुमान जी मंदिर तक शुरू की गई गोल्फ कार्ट सेवा का लगभग 9500 श्रद्धालुओं ने लाभ उठाया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को यह सेवा निःशुल्क उपलब्ध कराई गई। इससे वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं एवं दिव्यांग श्रद्धालुओं को विशेष राहत मिली।

वहीं, विभिन्न पिकअप प्वाइंट से मेला क्षेत्र के निकटतम पार्किंग स्थलों तक श्रद्धालुओं को पहुंचाने के लिए संचालित रैपिडो बाइक सेवा के माध्यम से लगभग 10 हजार बुकिंग की गईं, जिससे कम समय में सुगमता के साथ श्रद्धालु मेला क्षेत्र तक पहुंच सके।

प्रशासनिक सतर्कता, प्रभावी निगरानी और आधुनिक सुविधाओं के चलते पौष पूर्णिमा का प्रथम स्नान पर्व पूरी तरह सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सफल रहा, जिससे श्रद्धालुओं में संतोष और विश्वास का भाव स्पष्ट रूप से देखने को मिला।