भारतीय नौसेना को मिला अत्याधुनिक सर्वेक्षण पोत ‘संशोधक’, चार-पोत परियोजना पूरी

भारतीय नौसेना को चौथा और अंतिम सर्वेक्षण पोत ‘संशोधक’ सौंपा गया है, जिससे चार पोतों की परियोजना पूरी हो गई है। यह अत्याधुनिक जहाज समुद्री सर्वेक्षण, डेटा संग्रह और नौवहन मार्गों की पहचान में सक्षम है तथा आत्मनिर्भर भारत का प्रतीक है।

भारतीय नौसेना ने अपनी समुद्री क्षमता को और मजबूत करते हुए चौथे और अंतिम सर्वेक्षण पोत (विशाल) ‘संशोधक’ को अपने बेड़े में शामिल कर लिया है। इस अत्याधुनिक पोत को 30 मार्च 2026 को भारतीय नौसेना को सौंपा गया। इसका निर्माण गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड (GRSE), कोलकाता में किया गया है।

यह पोत चार बड़े सर्वेक्षण पोतों की श्रृंखला का अंतिम जहाज है, जिसके साथ ही यह महत्वपूर्ण रक्षा परियोजना सफलतापूर्वक पूरी हो गई है। इससे पहले इसी श्रेणी के तीन पोत—आईएनएस संधायक, आईएनएस निर्देशक और आईएनएस इक्षक—को क्रमशः 2024 और 2025 में सेवा में शामिल किया जा चुका है।

आधुनिक तकनीक से लैस है ‘संशोधक’

करीब 3400 टन विस्थापन और 110 मीटर लंबाई वाले इस पोत में अत्याधुनिक हाइड्रोग्राफिक और सर्वेक्षण उपकरण लगाए गए हैं। इसमें डेटा प्रोसेसिंग सिस्टम, स्वायत्त जलमार्ग वाहन, रिमोट संचालित वाहन (ROV), डीजीपीएस सिस्टम और डिजिटल साइड स्कैन सोनार जैसी उन्नत तकनीकें शामिल हैं।

यह पोत तटीय और गहरे समुद्र में सर्वेक्षण करने, नौवहन मार्गों की पहचान करने और समुद्र विज्ञान तथा भूभौतिकीय डेटा एकत्र करने में सक्षम है। रक्षा के साथ-साथ नागरिक उपयोगों में भी इसका महत्वपूर्ण योगदान होगा।

तेज गति और उच्च क्षमता

दो शक्तिशाली डीजल इंजनों से संचालित यह जहाज 18 समुद्री मील से अधिक की गति हासिल कर सकता है। इसे भारतीय शिपिंग रजिस्टर के मानकों के अनुसार डिजाइन और निर्मित किया गया है।

आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ा कदम

‘संशोधक’ में 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती देता है। इस पोत की डिलीवरी भारतीय रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी निर्माण और तकनीकी क्षमता का मजबूत उदाहरण है।

यह पोत हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक क्षमता को और सुदृढ़ करेगा, साथ ही MSMEs और भारतीय उद्योगों के सहयोगात्मक प्रयासों को भी दर्शाता है।